यह ब्लॉग मैं भारत के संविधान संरक्षक सुप्रीम कोर्ट के नाम लिख रहा हूं।
यह ब्लॉग सिर्फ दूर कहीं बैठकर संस्थाओं के लचरपन की वजह से झेलने वाली तकलीफों को बताने के लिए लिख रहा हूं, जिसका खामियाजा सिर्फ मैं ही नहीं बल्कि देश के लाखों करोड़ों युवा भुगत रहे हैं।
"इस ब्लॉग में कहीं भी सुप्रीम कोर्ट के प्रति अनादर या सुप्रीम कोर्ट के किसी माननीय न्यायाधीश के प्रति कोई दुर्भावना या बुरी नीयत से नहीं लिखा जा रहा है, ये सिर्फ अपनी व्यथा दूसरों को बताने और मेरे लाखों-करोडों साथियों से दर्द साझा करने के लिए लिख रहा हूं।"
ये ब्लॉग SSC Exam के पीड़ितों की आवाज है।
दरअसल हम अथाह मेहनत करने, दिन-रात पढ़ने, कोचिंग सेंटरों पर भटकने, घर-परिवार से दूर रहकर, कैसे भी गुजारा करके, पारिवारिक-सामाजिक मुश्किलों को झेलकर इन प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं।
सरकारी नौकरी करके देश के सिस्टम में सुधार लाने की इच्छा रखकर और खुद के लिए एक सम्मानजनक नौकरी लेकर परिवार एवं समाज का नाम रौशन करने का सपना लेकर मेहनत करते हैं।
आज देश में सरकारी नौकरियां वैसे भी खत्म होने की कगार पर है, उनमें लगातार कटौती की जा रही है, प्राइवेटाइजेशन और ठेका प्रथा अपनाने का कार्य जोरों से चल रहा है।
एक ऐसे दौर में जब किसी गलाकाट कॉम्पिटिशन वाली परीक्षा में लाखों-करोडों बच्चों से प्रतिस्पर्धा करने का तनाव रोज झेलने के साथ हम तैयारी करने उतरते हैं।
सिर्फ इस एक उम्मीद के साथ कि भले वैकेंसी कम हो पर कम से कम परीक्षा तो सही और समय पर आयोजित करवा ली जाए।
लेकिन ऐसा नहीं होता, आज राज्यों के चयन आयोगों की तो बात ही छोड़िए वहां तो हालात और भी ज्यादा बदतर है, उदाहरण के लिए किसी राज्य के चयन आयोग के बारे में आए दिन छपने वाली खबरों को बस ध्यान से पढ़ लिया कीजिए आपको हालात पता चल जायेंगे।
मैं बात करना चाहता हूं केंद्र सरकार के Department of Personnel and Training(DoPT) के अंतर्गत आने वाले विभागीय कर्मचारियों को नियुक्त करने वाले आयोग "Staff Selection Commission(SSC)" की जो पिछले कई सालो से बर्बादी की तरफ बढ़ रहा है और कोई इसपर ध्यान तक नहीं दे रहा, स्वयं प्रधानमंत्री DoPT के मंत्री है फिर भी इस आयोग की इतनी बुरी हालत है।
पांईंट बाई पांईंट बात रखता हूं।
इस आयोग ने Combined Graduation Level(CGL) परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन ------ तारीख को निकाला,
फार्म भरे गये लगभग 48लाख..
इस परीक्षा के चार स्तर होते हैं: Pre, Mains, Descriptive, Documents Verification/Computer Proficiency Test
पहला चरण: Pre Exam 5-Aug-2017 से शुरू होकर ***** तक चला।
इसका परिणाम आया ***** को जिसमें सिर्फ 1,45,000 प्रतियोगी पास हुए और अगले चरण के लिए क्वालीफाई हुए।
पर इस परीक्षा पर कुछ लोगों ने कोर्ट केस कर दिया और मामला दिल्ली हाईकोर्ट में गया, कारण ये था कि अलग-अलग दिन परीक्षा होने की वजह से परीक्षा का स्तर अलग-अलग है। तो कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंस गया। कुछ समय बाद ये मामला कोर्ट से क्लियर हुआ।
दूसरा चरण: लगातार कोर्ट केस की वजह से अटकता-अटकता आगे खिसकता गया, सितंबर 2017 में प्रस्तावित था पर अक्टूबर तक खिसका, फिर नवंबर में गया, फिर दिसंबर, फिर जनवरी और आखिरकार फरवरी-मार्च 2018 में यह परीक्षा हुई।
पर इस चरण में भी धांधली होने, परीक्षा के प्रश्नपत्रों के स्क्रीनशॉट बाहर आने जैसे आरोप लगाये गये, और 16-march-2018 को किसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी।
उस समय लाखों प्रतिभागी एक साथ आये और दिल्ली स्थित SSC HQ के सामने धरने-प्रदर्शन किए, सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाये गये, पूरे देश का ध्यान इस मामले की तरफ गया और सबने एक ही मांग रखी की इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध सीबीआई जांच होनी चाहिए।
समय सरकार पर चहुंओर से दबाव बनाया युवाओं ने और सरकार जांच के लिए मान गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध करने की मांग ठुकरा दी।
केस सुप्रीम कोर्ट में चलने लग गया और जांच समानांतर चल रही थी, साथ ही SSC ने दूसरे चरण का रिजल्ट घोषित कर दिया।
तीसरे चरण Descriptive के लिए ***** प्रतिभागी पास किये गए और यह परीक्षा ***** में ली गई।
अब SSC चौथे चरण के लिए क्वालीफाई करने के लिए छात्रों का चयन इन सभी चरणों के नंबरों के आधार पर कर चुकी थी और रिजल्ट 31-aug-2018 को घोषित होने वाला था, लेकिन...
कोर्ट में चल रहे केस की एक सुनवाई के दौरान केस करने वाले पक्ष ने परिणाम पर रोक लगवा दी..
वो दिन है और आज का दिन है, इस परीक्षा का रिजल्ट तैयार है पर आठ महीने से रूका हुआ पड़ा है।
इन आठ महीने के दौरान CBI जांच और कोर्ट की तारीखें पड़ती जा रही है पर कुछ भी निकलकर नहीं आ रहा, बस इन सबका जो परिणाम निकलकर आ रहा है वो ये कि इस कोर्ट केस ने लाखों प्रतिभागियों की जिंदगी बर्बाद कर दी और वो या तो परीक्षा पास करने के बावजूद घर पर हताश-निराश और डिप्रेशन का शिकार हुए बैठे है जिनके मन में रोज Suicidal Tendencies आती है(और ये सच है इससे आंख नहीं फेरी जा सकती) "*हिम्मत मत हारना दोस्तों, जिंदगी बहुत लंबी है बस इस दौर को उपर वाले की एक और परीक्षा के रूप में देखकर संघर्ष करो और अपने माता-पिता की, बहन-भाई की सोचकर देखना कि आपकी जान आपके परिवार के लिए कीमती है*"
एक और युवाओं का धड़ा बना है जो या तो इस परीक्षा के किस चरण में फेल होकर बाहर हो गये है या उनकी उम्र निकलती जा रही है, क्योंकि इसी ग्रुप ने कोर्ट में केस कर रखा है और बस अंधाधुंध एक ही मांग कर रहे हैं कि बस इस परीक्षा को पूरी तरह कैंसल कर दो। वो कहीं नहीं कह रहे कि गलत तरीके से परीक्षा पास करने वाले पकड़े जाये, या परीक्षा व्यवस्था में सुधार हो या सिस्टम में पारदर्शिता आये। उनकी बस एक ही रट है कि परीक्षा कैंसल हो, वो ये नहीं सोच रहे कि इस परीक्षा में लाखों लोग बैठे हैं उनमें से हजारों लोग अपने परिवारों की उम्मीद बनकर बैठते है, परिवार का सहारा बनना चाहते हैं, मेहनत से नौकरी पाना चाहते हैं, कोई अपनी बैंक की नौकरी छोड़कर इसकी तैयारी में आता है, कोई लाखों का पैकेज छोड़कर आता है, कोई घर से दूर किसी अनजान शहर में जाकर लाखों की फीस देकर तैयारी करके आता है, किसी के घर की माली हालत खराब है फिर भी संघर्ष करके तैयारी करता है.. एक बार उनके हालात सोचो.. और ऐसे सैंकड़ों उदाहरण मैने इन दिनों में देखे हैं...
हो सकता है कि कुछ लोगों ने गलत तरीके से परीक्षा पास की होगी, कहीं किसी स्तर पर धांधली हुई है तो जांच पर भरोसा रखो, और कुछ गलत लोगों की वजह से लाखों सही लोग और उनके परिजन क्यों भुगतें???
आज देश में किस योजना में धांधली नहीं होती? पर इसका मतलब ये थोड़ी है कि सरकार योजनाओं को बंद करदे??
और एक बार अपनी मांग का परिणाम तो सोचो..
अगर ये परीक्षा रद्द हुई तो यही प्रतिभागी जो इस बार रैंक लाकर टॉप पर बैठे हैं वही ज्यादातर वापस टॉप पर बैठेंगे तब क्या करोगे?? फिर कैंसल की मांग करोगे?
मांग करनी ही है तो कम से कम सिस्टम सुधार की मांग तो करो..
इस एक कोर्ट के कारण कोचिंग वालों ने अपने धंधे चमका लिए, राजनेताओं ने राजनीति चमका ली, वकीलों ने ज
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