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धर्मान्धता और धार्मिक भावनाओ का दुरूपयोग

धर्मान्धता और धार्मिक भावनाओ का दुरूपयोग : हालांकि अभी देश के वर्तमान हालात को देखते हुए धर्म के मुद्दे पर कुछ भी लिखना धर्म पर चोट करने के रूप मे लिया जा रहा है,भले ही वह धर्...

पदक नहीं तो सबक सही : India at Rio

जी हाँ..पदक नहीं तो सबक ही सही ..भारत को रियो से कुछ ना कुछ तो जरुर मिला है..अब ये हमपर निर्भर करता है कि हम इससे कितना सीखतें हैं.. इस ओलंपिक 2016 में भारत के 118 सदस्यीय दल का प्रदर्शन मेरी दुआओं के अनुसार ही चल रह है अब तक तो..(Tweet link)..हाँ मैने ये बुरी दुआ करी थी कि भारत इस ओलंपिक में एक भी पदक ना जीते..पर ऐसी दुआ मेरे दिमाग की दुआ थी..मेरे मन की तो बहुत सारी दुआऐं थी कि हर खिलाड़ी एक एक गोल्ड जीतकर लौटे....अच्छा हुआ कोई अबतक एक भी पदक नहीं जीता..और ना जीते तो और भी अच्छा...एक राज्य स्तरीय खिलाड़ी होने, एक शारीरिक शिक्षक का बेटा ह...

SSCExamScam

दोस्तों , आज देश के उस मुद्दे पर बात करते हैं जिससे देश के लाखों या करोड़ों युवाओं की और उनके परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती है , हालांकि ये मुद्दा हमारी मीडिया द्वारा उठाया जाना चाहिए पर आजकल वो किसी और ही मिशन में व्यस्त हैं. इसिलिए हमें उठाना पड़ रहा है. हम बात करते हैं देश की "परीक्षा व्यवस्था" की. मैं सिर्फ SSC के पेपर देता हूँ तो इसी की परीक्षा व्यवस्था की बात करूंगा. और अब तक SSC के इतने एक्जाम दे चुका हूँ कि गिनवाने लगा तो लिस्ट लंबी हो जायेगी. कल का अनुभव आपके साथ साझा करना चाहता हूँ , पहले तो मेरा मन ही नहीं हुआ ,  मन में सवाल आये कि क्यों लिखूं ? किसके लिए लिखूं ? कौन है जो हम परीक्षा व्यवस्था के पीड़ितों की आवाज सुनेगा ? हम सब बस पीड़ितों की तरह रोज सोशल मीडिया पर   कराह रहे हैं और कोई सुन ही नहीं रहा तो क्या फायदा लिखने का ? पर जब रवीश कुमार जैसे कुछ पत्रकारों को रोज आवाज उठाते देखते हैं तो खराब सिस्टम से लड़ने की ऊर्जा मिलती है तो सोचा लिखकर बताया जाये , क्या पता कोई साथी इसे पढकर सिस्टम की खामियों से लड़ने का हौसला जुटा ले. इसिलिए यहाँ लि...

सड़ी हुई परीक्षा व्यवस्था

दोस्तों, आज देश के उस मुद्दे पर बात करते हैं जिससे देश के लाखों या करोड़ों युवाओं की और उनके परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती है, हालांकि ये मुद्दा हमारी मीडिया द्वारा उठाया जाना चाहिए पर आजकल वो किसी और ही मिशन में व्यस्त हैं. इसिलिए हमें उठाना पड़ रहा है. हम बात करते हैं देश की "परीक्षा व्यवस्था" की. मैं सिर्फ SSC के पेपर देता हूँ तो इसी की परीक्षा व्यवस्था की बात करूंगा. और अब तक SSC के इतने एक्जाम दे चुका हूँ कि गिनवाने लगा तो लिस्ट लंबी हो जायेगी. कल का अनुभव आपके साथ साझा करना चाहता हूँ, पहले तो मेरा मन ही नहीं हुआ, मन में सवाल आये कि क्यों लिखूं? किसके लिए लिखूं? कौन है जो हम परीक्षा व्यवस्था के पीड़ितों की आवाज सुनेगा? हम सब बस पीड़ितों की तरह रोज सोशल मीडिया पर  कराह रहे हैं और कोई सुन ही नहीं रहा तो क्या फायदा लिखने का? पर जब रवीश कुमार जैसे कुछ पत्रकारों को रोज आवाज उठाते देखते हैं तो खराब सिस्टम से लड़ने की ऊर्जा मिलती है तो सोचा लिखकर बताया जाये, क्या पता कोई साथी इसे पढकर सिस्टम की खामियों से लड़ने का हौसला जुटा ले. इसिलिए यहाँ लिखकर बता रहा हूँ. कल ...