दोस्तों , आज देश के उस मुद्दे पर बात करते हैं जिससे देश के लाखों या करोड़ों युवाओं की और उनके परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती है , हालांकि ये मुद्दा हमारी मीडिया द्वारा उठाया जाना चाहिए पर आजकल वो किसी और ही मिशन में व्यस्त हैं. इसिलिए हमें उठाना पड़ रहा है. हम बात करते हैं देश की "परीक्षा व्यवस्था" की. मैं सिर्फ SSC के पेपर देता हूँ तो इसी की परीक्षा व्यवस्था की बात करूंगा. और अब तक SSC के इतने एक्जाम दे चुका हूँ कि गिनवाने लगा तो लिस्ट लंबी हो जायेगी. कल का अनुभव आपके साथ साझा करना चाहता हूँ , पहले तो मेरा मन ही नहीं हुआ , मन में सवाल आये कि क्यों लिखूं ? किसके लिए लिखूं ? कौन है जो हम परीक्षा व्यवस्था के पीड़ितों की आवाज सुनेगा ? हम सब बस पीड़ितों की तरह रोज सोशल मीडिया पर कराह रहे हैं और कोई सुन ही नहीं रहा तो क्या फायदा लिखने का ? पर जब रवीश कुमार जैसे कुछ पत्रकारों को रोज आवाज उठाते देखते हैं तो खराब सिस्टम से लड़ने की ऊर्जा मिलती है तो सोचा लिखकर बताया जाये , क्या पता कोई साथी इसे पढकर सिस्टम की खामियों से लड़ने का हौसला जुटा ले. इसिलिए यहाँ लि...