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धर्मान्धता और धार्मिक भावनाओ का दुरूपयोग

धर्मान्धता और धार्मिक भावनाओ का दुरूपयोग :
हालांकि अभी देश के वर्तमान हालात को देखते हुए धर्म के मुद्दे पर कुछ भी लिखना धर्म पर चोट करने के रूप मे लिया जा रहा है,भले ही वह धर्म की रक्षा करने के लिए लिखा गया हो...
तो मैं यह खतरा उठाकर आज धर्मान्धता और धार्मिक भावनाओ के दुरूपयोग के मुद्दे पर ये ब्लॉग लिख रहा हूँ ,जिसे मैने इन दिनों अनुभव किया है और मुझे लगता है कि आपने भी किया होगा ,हो सकता है कि आप उसका हिस्सा भी रहे हों ...
धर्मान्धता शब्द का अर्थ है धर्म के प्रति अन्धापन या किसी भी धार्मिक मुद्दे का आँख मूँदकर समर्थन करना ..बेश़क हर वयक्ति के मन मे धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा होती है ,स्वधर्म के प्रति श्रद्धा तथा अन्य धर्मो के प्रति आदर-सम्मान का भाव ...
परन्तु आजकल के सोशल मीडिया के जमाने में कुछ ताकतें(असामाजिक तत्व या धर्म के स्वघोषित ठेकेदार) आम आदमी की स्वधर्म के प्रति श्रद्धा को एक ऐसे स्तर तक पहुँचाने में लगी हुई है जहाँ पहुँचकर उस व्यक्ति को सिर्फ अपना ही धर्म नजर आये ,और अन्य धर्मों के प्रति उसके मन में स्थित आदर-भाव को नफरत से प्रतिस्थापित कर दिया जाये,और इसी को धार्मिक भावनाओं का दुरूपयोग भी कहा जा सकता है..
और इस धर्मविनाशी मुहिम मे वो ताकतें कुछ हद तक कामयाब भी हुई है,क्योंकि ये खेल अचानक शुरू हुआ है ऐसा नहीं है,ये कब से चला आ रहा है तथा कब तक चलेगा इसका कुछ नहीं कहा जा सकता...
परन्तु इस सोशल मीडिया के जमाने में इसके तरीके बदल गये है तथा इसके शिकार भी बदल गये है.
अब लोगों को इस प्रकार से बहकाया(बरगलाया) जाता है कि आप इस फोटो/पोस्ट/मैसेज को दस लोगों के साथ/दस मिनट मे शेयर कीजिए कोई अच्छी खबर मिलेगी, पर जरा सोचिए की अच्छी खबर का और शेयर करने का आपस में क्या रिश्ता????
या जब ये फेसबुक,ट्विटर,व्हाट्सएप,इंस्टाग्राम,ब्लॉगर आदि सब नही बने थे तब क्या लोगों को शुभ समाचार नहीं मिलते थे??
या वे लोग जो ऐसे भड़काऊ पोस्ट को शेयर नहीं करते क्या उन्हे कभी कोई अच्छी खबर नहीं मिलती???
जी नहीं,बल्कि ना शेयर करने वाले को अच्छी खबरें ज्यादा मिलेंगी,क्योंकि उसने सोच-समझकर निर्णय लिया और शेयर ना करके उसने समझदारी का परिचय दिया है और उसके मन मे धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा है,तथा वह धार्मिक मुद्दे पर अन्य बेवकूफों की तरह आसानी से बहकावे मे नही आता,वह अपने तथा दूसरे के धर्म की रक्षा कर सकता है, जबकि वे लोग जो दस मिनट में दस लोगों के साथ उस पोस्ट को शेयर करते हैं,वे लोग अपनी धार्मिक और मानसिक पंगुता को प्रदर्शित करते हैं.
इस प्रकार के लोग स्वयं धर्मविनासक हो सकते हैं या फिर चाहे-अनचाहे रूप से इस कार्य का हिस्सा बन सकते है,ये छोटे-छोटे कदम धर्म विनाश के कारण बन सकते है...
शेयर करने वाले तो मन ही मन खुश होते होंगे कि अब तो खुशखबरी मिलने वाली है,पर नहीं आपका एक शेयर/लाईक/कमेंट उन लोगों या उन पेजनिर्माताओं के लिए खुशखबरी बनता है जिन्होने उस पोस्ट को बनाया और सबसे पहले सोशल मीडिया पर अपलोड किया,उस आपत्तिजनक पोस्ट बनाने वाले को रूपये का भुगतान प्रति शेयर,लाईक और कमेन्ट के आधार पर होता है,तो शेयर करने वाले खुश तो बहुत होंगे,पर पेज एडमिन से ज्यादा नहीं...
हो सकता है कि मैं इस मुद्दे को कुछ ज्यादा ही बढा-चढाकर पेश कर रहा हूँ,परन्तु यह जरूरी भी है ताकि इसी बहाने कम से कम आप इस मुद्दे पर विचार तो करें,क्योकि मुझे व्यक्तिगत तौर पर इस तरह के आपत्तिजनक और घिनौने पोस्ट देखकर और पढकर बड़ा गुस्सा आता है.
इनके प्रकार भी बहुत है,और कितनी काबिल-ए-गौर की बात है ऐसे पोस्ट प्रत्येक धर्म के लिए बने हैं जैसे कि-
कृष्ण जी की फोटो,
गुरूनानक जी की फोटो,
महावीर जैन जी की फोटो,
मक्का-मदीना का फोटो,
गौतम बुद्ध जी फोटो,
मोहम्मद पैगम्बर जी का फोटो,
राम-दरबार का फोटो,
अयोध्या राम मन्दिर की ग्राफिकल रूप से बनाई फोटो,
धार्मिक वाक्यों की फोटो,
दूध पीती मूर्तियाँ,
चमत्कारी पेड़,
और अन्य धर्मों की बुराईयाँ,तरीके,विधियाँ आदि.
और इसके सिर्फ धर्म से ही नही बल्कि इमोशन्स(भावनाओं) से भी है जिसमे निम्न तरह के पोस्ट होते है,
पाँच पैर वाली गाय,
दो सिर वाला बच्चा,
एक्सिडेंट की फोटोज,
त्योहारों(होली,दीवाली,ईद,क्रिसमस,लोहड़ी,दीक्षाग्रहण) की शुभकामनाएँ
माता-पिता से संबंधित(share if you love your mother),
आर्मी के जवानो की फोटो( 1 like= 1 respect,1 share = 10 respect),
बच्चों की विकलांगता को दैविक रूप दर्शाना,आदि.
इनमे साथ मे लिखा होता है कि आपका एक शेयर/लाईक/कमेन्ट फोटो वाले शक्स की जान बचा सकता है,पर जरा सोचिये कि उस शक्स की जान आपका लाईक/शेयर/कमेन्ट बचायेगा या फिर डॉक्टर बचायेगा?? पर फोटो बनाने वाले भी बहुत समझदार होते है और वो ऐसी घिनौनी (खून से लथपथ) फोटो डालते है जिसे कोई आम भावुक इंसान इग्नोर नही कर सकता और उस पोस्ट से पीछा छुड़ाने के लिए लोग लाईक कर देते है,जबकि उन्हे उस पोस्ट को "रिपोर्ट पोस्ट" करना चाहिए ताकि उसके खिलाफ ज्यादा रिपोर्टस देखकर फेसबुक,व्हाट्सएप आदि उस पोस्ट को ब्लॉक कर दे और अपने डाटाबेस से हटा दे.
इसका एक और प्रकार है जिसमे धार्मिक गानों को रिंगटोन लगाने की सलाह दी जाती है,या फिर किसी बाबा,पंडित,गुरूजी,धर्मगुरू,मौलवी आदि के तथाकथित चमत्कारों की व्याख्या की जाती है,और आपको कहा जाता है कि इनकी शरण मे आईए और अपनी समस्याओं का समाधान पाईए,पर जरा सोचिए कि क्या कोई इंसान आपकी समस्याओं का हल कर सकता है क्या???
सुख-दुख देना उपरवाले के हाथ मे है,और उपरवाला भी उसी के दुख दूर करता है जो पुरूषार्थ करता है,मेहनत करता है,और चुनौतियों का सामना करता है,ना कि उसके जो किसी दूसरे की शरण मे जाकर उससे दुख दूर करने की गुहार लगाता है,ऐसे कर्मविमुख लोगो के नसीब में और भी ज्यादा दुख आते है ,जैसे आप जानते होंगे रामपाल,आसाराम,औवेसी बंधु,डॉ जाकिर ,नित्यानंद,गुरमीत राम रहीम, आदि अनन्त.
इसलिए आपसे अनुरोध है कि इस धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले युग में धार्मिक मुद्दों पर कोई भी फैसला लेने से पहले रूकें और सोचें फिर निर्णय लीजिए,तथा किसी अन्य(मित्र या रिश्तेदार या अनजान) को ऐसा कार्य करते देखें तो उन्हे इसका कारण पूछें फिर समझायें और सिक्के का ये पहलु भी दिखायें...
और मैं यह पहले ही साफ कर दूँ कि ये ब्लॉग पोस्ट किसी भी व्यक्ति,संगठन या धर्म विशेष को निशाना बनाकर नही लिखा गया है,बल्कि इसमे उन मुद्दों का उल्लेख किया गया है जो कि सब धर्मों को नुकसान पहुँचाने का कार्य कर रहे है.
और मैने यह ब्लॉग किसी फिल्म(Ohh my god,PK)  या धारावाहिक देखकर अचानक आये जोश की वजह से नहीं लिखा है बल्कि एक पूरी Research और Observations के आधार पर लिखा है,बल्कि बीकानेर से रतनगढ की तीन घंटे लंबी यात्रा के दौरान दिनांक 25 दिसम्बर को लिखा है|
अत: आपसे अनुरोध है कि आप इस ब्लॉग को पढे़ तथा अन्य लोगों को भी ऐसी जानकारियाँ दें जो उनकी मदद कर सकती है तथा उम्मीद है कि मेरे( प्रशान्त चारण) द्वारा लिखे गये इस ब्लॉग पर आप अपनी अनमोल राय देंगे|
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद,अपना समय निकालकर ये ब्लॉग पढने के लिए.
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धन्यवाद ... 🙏🙏🙏😊😊☺☺

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