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SSCExamScam

दोस्तों, आज देश के उस मुद्दे पर बात करते हैं जिससे देश के लाखों या करोड़ों युवाओं की और उनके परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती है, हालांकि ये मुद्दा हमारी मीडिया द्वारा उठाया जाना चाहिए पर आजकल वो किसी और ही मिशन में व्यस्त हैं. इसिलिए हमें उठाना पड़ रहा है.
हम बात करते हैं देश की "परीक्षा व्यवस्था" की.
मैं सिर्फ SSC के पेपर देता हूँ तो इसी की परीक्षा व्यवस्था की बात करूंगा. और अब तक SSC के इतने एक्जाम दे चुका हूँ कि गिनवाने लगा तो लिस्ट लंबी हो जायेगी.

कल का अनुभव आपके साथ साझा करना चाहता हूँ, पहले तो मेरा मन ही नहीं हुआ
मन में सवाल आये कि क्यों लिखूं?
किसके लिए लिखूं?
कौन है जो हम परीक्षा व्यवस्था के पीड़ितों की आवाज सुनेगा?
हम सब बस पीड़ितों की तरह रोज सोशल मीडिया पर  कराह रहे हैं और कोई सुन ही नहीं रहा तो क्या फायदा लिखने का?

पर जब रवीश कुमार जैसे कुछ पत्रकारों को रोज आवाज उठाते देखते हैं तो खराब सिस्टम से लड़ने की ऊर्जा मिलती है तो सोचा लिखकर बताया जाये, क्या पता कोई साथी इसे पढकर सिस्टम की खामियों से लड़ने का हौसला जुटा ले. इसिलिए यहाँ लिखकर बता रहा हूँ.

(write some introductory part here)

या को समझाने के लिए ये ट्विट सीरिज लिख रहा हूँ. पढ़े-समझें कि किस तरह लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है और किसी का इस तरफ ध्यान नहीं गया. पर अब बहुत हो गया..इस बार आर या पार.. सिस्टम में जाकर तो सुधार करना ही है, अब तो सुधार करके ही घुसेंगे.
SSC: Staff selection commission (कर्मचारी चयन आयोग) भारत सरकार का आयोग है जो कार्मिक मंत्रालय के अंतर्गत आता है, इसका प्रभार प्रधानमंत्री के पास है. आयोग नौकरशाही के हजारों पदों को भरता है. यह आयोग अपनी ढिलाई, पेपर लीक, भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात है.
SSC चार बड़े एक्जाम करवाता है. 1. Combined Graduate level(CGL) 2. Central Police Officer(CPO) 3. Combined Higher Secondary Level(CHSL) 4. Multi Tasking Staff(MTS) इन एक्जाम में हर साल दिक्कतें होती है. जिनमें मुख्यत: लीक, नकल, ढिलाई, मेरिट, प्रकिया, ज्वाइनिंग अटकना.
इन परीक्षाओं में लगभग भरे जाने वाले फॉर्म की संख्या सुनकर आप हैरान हो जायेंगे. CGL-30लाख, पद-8000 MTS- 70लाख, पद-10000 CPO- 10लाख, पद-4000 CHSL- 30लाख, पद-6700 और ये परीक्षाऐं हर बार लेट होती है, तय तारीख से हमेशा लेट होती है, SSC tentative calendar निकालती रहती है.
हर साल ये होता है और सालों से होता आया है, सरकार कोई भी हो और ये घपले राज्यों के चयन आयोगों में आम बात है. लेकिन इस बार देश का युवा कुछ और ही मूड में है और अपना हक तथा स्वच्छ भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर सड़क पर उतरा है और अब भ्रष्ट व्यवस्था उखाड़कर रहेगा.
इस बार हद हो गई जब भविष्य के साथ खिलवाड़ चरम पर पहुंच गया. CGL परीक्षा का प्रथम चरण 5-21अगस्त तक रोज हुआ, और हर दिन परीक्षा का स्तर अलग होने की वजह से SSC में मेहनत की बजाय किस्मत ज्यादा बड़ा फैक्टर बन गई. और नॉर्मलाइजेशन ना होने की वजह से लाखों के साथ अन्याय हुआ.
CGL का प्रथम चरण होने के बाद द्वितीय चरण पहले नवंबर, फिर दिसंबर, जनवरी, फरवरी तक खींचा गया. 17-21फरवरी को द्वितीय चरण में अनियमितताओं की हद हो गई. और इस बार भी हर दिन परीक्षा का स्तर हर दिन बदलता रहा जिससे फिर किस्मत पर आ गई बात. और बिना बताये पैटर्न बदल देते हैं.
सबसे ज्यादा अन्याय और अत्याचार हम 21फरवरी वालों के साथ हुआ, परीक्षा बंद दमघोंटू कंप्यूटर सेंटर पर हुई, सुबह 8:30बजे अंदर बिठाया, 10:30बजे परीक्षा शुरू, 15 मिनट बाद परीक्षा रूकवाई कहा टैक्निकल गड़बड़ है. 12:18-2:18 बजे दोबारा शुरू हुआ, तब तक पानी-वॉशरूम भी ना जाने दिया. कई सेंटर पर इस गफलत के चक्कर में बच्चे हड़बड़ा गये, पेपर सही नहीं कर पाये, और कुछ जगह बच्चे बाहर भी निकल गये, SSC ने शायद एक्सन भी लिया है.
फिर 2:30 बजे उस दमघोंटू सेंटर से बाहर निकले तो कुछ मिनट बाद दूसरे अंग्रेजी के पेपर के लिए अंदर बुलाया, बिना कुछ खाये 4:15-6:15 पेपर दिया.
जब पेपर देकर आये तो फेसबुक पर हमारे पेपर की फोटोज लीक हो गई जो कि एक्जाम कराने वाले वेंडर या सेंटर वालों के बिना नामुमकिन है. एक दिन बाद 17-21 वालों की सारी फोटोफ बाहर आ गई, हमारी सालों की मेहनत मिट्टी में मिल गई और पैसे देकर लोगों ने पेपर लीक कर लिया.
ये SSC CGL 2017 एक्जाम के हालात है, पर SSC से केवल इसिलिए नाराजगी नहीं है, दिक्कत ये है कि SSC पेपर पास करने के बाद भी ज्वाइनिंग देने में महीनों-सालों लगा देती है. अब तक CGL2016, CHSL2015 वाले इंतजार में हैं. रोज ट्विटर पर रोते हैं. MOS DoPT  ब्लॉक कर रखा है.
"SSC की दूसरी बड़ी धांधली" MTS(Multi tasking staff) यानि 10000 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लेने के लिए परीक्षा थी. 70 लाख फॉर्म भरे, मार्च-मई2017 में ऑफलाईन पेपर हुआ वो लीक हो गया, फिर सितंबर-नवंबर2017 में दोबारा ऑनलाईन हुआ. दिसंबर में परिणाम आया, कट ऑफ 100/150 थी
प्रथम परीक्षा में 1.5 लाख पास हुए.उन्हें द्वितीय स्तर परीक्षा (Descriptive) के लिए बुलाया. वो परीक्षा हुई और रिजल्ट 31मार्च को आने की बात थी. अचानक 21फरवरी को SSC ने राज्यवार नई कटऑफ 123/150 करदी. और 23000 को Docc. verification के लिए बुला लिया. वो सवा लाख सीधे बाहर.
MTS के Tier-1 में खूब नकल हुई, बाद में Tier-2 के लिए कटऑफ 100/150 रखी, Tier-2 हुआ पर उसकी सिर्फ 33% नंबरों से क्वालिफाईंग कर दिया, और नई कटऑफ 123/150 करी तथा Documents verification के लिए जल्दी बुला लिया. रविवार को भी Doccument Verification हुआ है.
SSC की PDF लिस्ट आई जिसमें MTS प्रथम स्तर का परिणाम था, उसमें बच्चों ने अपनी मेहनत से बहुत सारी धांधली खोज डाली. दो कॉलेजों से भारी संख्या में बच्चे पास हुए, एक परिवार के बच्चों का लगातार पास होना और कुछ छात्रों से पैसे देकर नाम जोड़ने का भी सुना.(SSC ने नोटिस भी जारी किया इसपर).
हमें SSC से या सरकार से कोई दुश्मनी नहीं है, हमने तो मोदीजी को चुना ही व्यवस्था परिवर्तन के लिए था. आज उनकी नाक के नीचे, उन्हीं के विभाग में ऐसी धांधलियां चल रही है, चिराग तले अंधेरा नहीं चलेगा. हमें अब प्रधानसेवक जी से पर जवाब और CBI जांच चाहिए.
SSC और चयन आयोंगों के खिलाफ लड़ने की हिम्मत देने के लिए हम रवीश को जितना धन्यवाद और दुआऐं दे, वो कम है.
जब मीडिया हिंदु-मुस्लिम में व्यस्त था, तब ये नौकरी पर लेकर आया, हमारी आंखे खोली. अब नो हिंदु-मुस्लिम, बस अच्छाई और सच्चाई. धन्यवाद रवीश, आपके लिए शब्द कम हैं.
हमारी ना SSC से दुश्मनी है ना ही किसी सच्चे मेहनती विद्यार्थी से. SSC की परीक्षाओं पर लग रहे आरोपों को जांच कराने में क्या आंच? जब SSC साफ-सुथरी है तो CBI जांच से क्यों डर रही है? CGL & MTS दोनों की जांच कराओ. जो लोग पर बोलते हैं ध्यान दें, दिक्कत सिर्फ CGL की नहीं बल्कि MTS की भी है. सुनिये इन अधिकारी को( https://youtu.be/FgBOc6_Cesk ) कि MTS में किस तरह एक्जाम सेंटर बिकते हैं और लाखों के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं.
हम इस सब गड़बड़ियों की CBI जांच चाहते हैं बस.
सरकार से की Time Bound CBI जांच चाहिए. हम लोग अपनी पारिवारिक समस्याओं से लड़कर SSC की तैयारी करतें हैं, अगर ये परीक्षा रद्द हुई या और आगे खिसकाई तो हम क्या करेंगे? जल्द जांच कीजिए और भ्रष्ट अधिकारियों, एक्जाम सेंटर वालों, एक्जाम वेंडर, भ्रष्ट प्रतियोंगियों को सजा दो.
SSC की परीक्षाओं में ज्यादातर गरीब छात्र आते हैं. हजारों रूपये कोचिंग फीस, शहर में कमरे किराये पर लेकर, गंदा खाना खाकर भी वो पढाई में सालों-साल जुटे रहते हैं बस एक सरकारी नौकरी की आस में. सबकी पारिवारिक समस्याऐं, पैसों की किल्लत होती है, पर वो पढने में लगे रहते हैं.
आप अगर इन छात्रों के मन की व्यथा और पीड़ा देखना-पढना चाहते हैं तो पढ़े न कविताओं को, जो उन्होने SSC और सिस्टम के अन्याय से तंग आकर लिखी है.
कोई इंसान कवि तभी बनता है जब मन में दर्द भरा हो. आप सोचिये नकी हालत.
SSC परीक्षा-नौकरी और विभाग CGL- Income Tax, Excise, Customs, Examiner, Tax Assistant. CPO- inspector in Delhi Police, BSF, CISF, ITBP, CRPF. CHSL- LDC & UDC in Various ministries, DEO in CAG. MTS- Multi tasking staff mainly Peon. यहाँ भ्रष्ट पहुंचे तो क्या होगा?
SSC की परीक्षा की सबसे कमजोर कड़ी उसके एक्जाम सेंटर्स हैं और एक्जाम करवाने वाली कंपनी, उसके बाद SSC के कर्मचारी शक के दायरे में हैं. हम चाहते है कि SSC किसी भरोसेमंद कंपनी से एक्जाम करवाये और सेंटर की पुख्ता जांच के बाद वहाँ पेपर करवाये जायें.
इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ हमारा आंदोलन बिखरा या बिना वाजिब मांगो वाला नहीं होना चाहिए. हमारी मांग साफ है कि SSC की दो परीक्षाऐं MTS और CGL की भरोसेमंद, समयबद्ध, पारदर्शी CBI जांच हो और परीक्षा पर जल्द फैसला हो. क्योंकि हम और सालों का इंतजार नहीं कर सकते.
आंदोलन की सबसे बड़ी गलती होती है कि "लोगों की महत्वकांक्षाऐं". कोई नेता बनना चाहता है, कुछ तत्व आंदोलन को हाइजैक करना चाहते हैं, कुछ लोग आंदोलन को किसी तरह तहस-नहस करना और भटकाना चाहते हैं. आंदोलन की जीत यही होती है कि वो इन सब समस्याओं से अच्छे से निपट लें.
हमें सरकार से कहीं ज्यादा सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है. अगर मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होती है तो सब धांधली बाहर आ जायेगी और मेहनतकश छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय करने वालों पर कड़ी कार्यवाही होगी. हमें उम्मीद है अब इस मुद्दे का हल निकलेगा.
अगर SSC MTS भर्ती की जांच नहीं हुई तो रिश्वत देकर लगने वाले लड़के विभिन्न मंत्रालयों(Defense, NIA, IB) में नौकरी पाकर देश की सुरक्षा खतरे में डालेंगे. इस भर्ती का अंतिम चरण Documents verification जल्दबाजी में चल रहा है.
हम की समयबद्ध सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में CBI जांच इसिलिए चाहते हैं क्योंकि 2012-14 में जालसाजी से नौकरी पाई और 5साल नौकरी कर गये ये, सोचिये कि इतने समय में कितनी गोपनीय सूचनायें बेची होंगी इन्होने?
ये एक बहुत बड़ी समस्या और घोटाला है, रोको इसे.
परिवार वाले कब तक कर्ज लेकर हमें पढायें? और हम पढाई में पैसा बर्बाद क्यों करें जब नौकरी मिलनी नहीं है. कब तक तिलक-पूजा करके घर से निकलें और पता चला कि कोई पैसा देकर घर बैठा नौकरी लग रहा है, वो हमसे अच्छी देशसेवा करेगा. रोज घरवालों की उम्मीद नहीं तोड़ सकते. कब तक भ्रम में जियें?
हमारे यहाँ सरकारी नौकरी सपना होती है, पैशन होती है.
सरकारी स्कूल में पढ़े तो सपना देखा कि नौकरी तो सरकारी लगेंगें, पर जब आकर यहाँ हालात देखे तो सच दिख गया कि पैसा फेंको-नौकरी लगो. फिर हम क्यों पढ़ें, क्यों मेहनत करे?
हम सरकारी नौकरी लगकर अच्छा काम करना चाहते हैं, वहाँ मेहनत करके देश को अच्छा बनाने का सोचकर पढ़ते हैं, पर जब पैसे देकर कोई नाकारा लगेगा तो फिर भुगतेगा कौन? देश की जनता ना? मतलब हम लोग.
हमें परिवार वाले लोन लेकर ग्रेजुएट बनाते हैं, अच्छी डिग्रियाँ-कोर्स करवाते हैं ताकि अच्छी नौकरी मिल जाये, लेकिन क्या काम की हमारी मेहनत जब कोई एक महीने में चार साल की फर्जी डिग्री ले आये.
हम बहुत मेहनत करके पढते हैं, बहुत समस्याऐं झेलकर पढते हैं, हमारी पढाई का ऐसे मजाक मत बनाओ जी. आप नौकरियाँ तो कम कर ही रहे हो, फिर जो बची-खुची है उसमें भी धांधली हो तो हम कहाँ जायें?
यहाँ लाखों बच्चों का भविष्य दाँव पर लगा है, उनके और उनके परिवार की जिंदगियाँ प्रभावित हो रही है और हमारे मीडिया वालों को हिंदु-मुस्लिम और चाटुकारिता से ही फुर्सत नहीं है. ऐसा मृत विपक्ष तो कहीं ना होगा दुनिया में. क्या दौर चल रहा है.
जनता तो 70साल से चुप है ही..उनको तो नेता आसानी से मूर्ख बना सकते हैं.
हिंदु-मुस्लिम वाले, नकल वाले अच्छी मेहनत कर रहे हैं वो कामयाब होंगे.

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