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सड़ी हुई परीक्षा व्यवस्था

दोस्तों, आज देश के उस मुद्दे पर बात करते हैं जिससे देश के लाखों या करोड़ों युवाओं की और उनके परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती है, हालांकि ये मुद्दा हमारी मीडिया द्वारा उठाया जाना चाहिए पर आजकल वो किसी और ही मिशन में व्यस्त हैं. इसिलिए हमें उठाना पड़ रहा है.
हम बात करते हैं देश की "परीक्षा व्यवस्था" की.
मैं सिर्फ SSC के पेपर देता हूँ तो इसी की परीक्षा व्यवस्था की बात करूंगा. और अब तक SSC के इतने एक्जाम दे चुका हूँ कि गिनवाने लगा तो लिस्ट लंबी हो जायेगी.
कल का अनुभव आपके साथ साझा करना चाहता हूँ, पहले तो मेरा मन ही नहीं हुआ,
मन में सवाल आये कि क्यों लिखूं?
किसके लिए लिखूं?
कौन है जो हम परीक्षा व्यवस्था के पीड़ितों की आवाज सुनेगा?
हम सब बस पीड़ितों की तरह रोज सोशल मीडिया पर  कराह रहे हैं और कोई सुन ही नहीं रहा तो क्या फायदा लिखने का?
पर जब रवीश कुमार जैसे कुछ पत्रकारों को रोज आवाज उठाते देखते हैं तो खराब सिस्टम से लड़ने की ऊर्जा मिलती है तो सोचा लिखकर बताया जाये, क्या पता कोई साथी इसे पढकर सिस्टम की खामियों से लड़ने का हौसला जुटा ले. इसिलिए यहाँ लिखकर बता रहा हूँ.
कल मेरे साथ कुछ यूँ हुआ:
कल मेरा SSC CHSL 2017(Combined Higher secondary level) prelims का एक्जाम था.
मेरा एक्जाम "Balaji Computer centre, udasar road, Bikaner" में था. ये सेंटर पहले "Sai computer centre" नाम से था लेकिन साझेदार में झगड़ा होने की वजह से अलग हो गये और इनका पुराना साझेदार पहले यहाँ खूब नकल करवाता था, MTS 2016(Multi tasking staff) prelims में इन्होने इस सेंटर पर खूब नकल करवाई थी और यहाँ के एक्जाम देने वाले कुछ नकलची प्रतिभागियों के 150 में से 140+ नंबर भी आये हैं.
अभी वो साझेदार "राजस्थान पुलिस कॉनिस्टेबल" भर्ती में नकल करवाने वाले गिरोह में पकड़ा गया है.
(ये सब मुझे उसके पुराने साथी ने मुझे पेपर शुरू होने से पहले बताई थी, क्योंकि बीकानेर में दो-तीन सेंटर ही आते हैं SSC के तो invigilator मुझे शक्ल से जानतें है और बातूनी व्यवहार भी एक कारण है)
उससे मैने पूछा कि भाई इस बार तो यहाँ वैसे नकल वाले हालात नहीं है ना?
तो उसने कहा कि नहीं अब यहाँ ऐसा नहीं है, हमने उस साझेदार को इसिलिए निकाला था कि वो नकल करवाता था.
कुछ देर बाद वहाँ के Invigilators में से एक और लड़का आया और उसने आधार कार्ड देखकर मुझसे जानकारी बढाई, उसने बताया कि वो हमारे समाज का ही है और मेरे गाँव के लोगों को अच्छे से जानता है.
उसने मुझसे पूछा भी कि कैसी है तैयारी और कौनसा विषय स्ट्राँग है तो मैने सामान्य जवाब दिया कि SSC में धांधली चल रही है, और सीटें भी कम हो रही है तो उस जोश से तैयारी तो करने का मन नहीं हुआ पर फिर भी पुराने पेपर देने की वजह से तैयारी अच्छी है.
फिर उसने बताया कि जिस हॉल में मैं था, उसी में मेरे गाँव की ही हमारे समाज की एक लड़की का सेंटर है, चूंकि मैं उनको नहीं जानता पर उनके पापा को जानता हूँ थोड़ा.
फिर उन्होने सबको कंप्यूटर सिस्टम पर लॉगिन करने को कहा.
मैने लॉगिन किया तो मेरी कंप्यूटर स्क्रीन बहुत छोटी आ रही थी, तो मैने Room invigilator से कहा कि मेरी सीट बदलो ये स्क्रीन बहुत छोटी है, और मुझे ऐसी दिक्कत नहीं झेलनी.
उन्होने कहा कि ये बाद में सही हो जायेगी पर मैने कहा कि पेपर शुरू होने के बाद मुझे परेशान होना पड़ेगा, मेरा पेपर खराब हो जायेगा, इसिलिए मेरी सीट बदलो.
तब उन्होने सीट बदल दी.
कुछ देर बाद जैसे ही पेपर शुरू हुआ, मैने 2-3 सवाल किये और फिर उनमें से एक Invigilator मेरे पास एक खाली रफ शीट लेकर आया और मेरी रफ शीट के नीचे धीरे से रखते हुए बोला कि आप जो भी सवाल करो उसका उत्तर इस खाली पेपर पर लिख देना,
मेरा दिमाग खराब हो गया, और मैने उसको जोर से लताड़ा कि तुम लोग पागल हो क्या???
तुम लोग मुझे नकल करवाने का कह रहे हो, तुम्हें पता है कि क्या कि लोग कितनी मेहनत करतें है इसके लिए?? मैं कुछ नहीं लिखूंगा.
वो सकपका गया|
और उसने वो रफ शीट वापस अपने पास ले ली, और बोला कोई बात नहीं, कोई बात नहीं, आप पेपर करो.
मैं वहाँ शोर मचाने वाला था लेकिन मुझे पता था कि सबका पेपर शुरू हो चुका है और उस एक घंटे में बच्चे सिर्फ सवाल करेंगे क्योंकि वर्षों की मेहनत की हुई होती है उनकी.
मैं भी फिर वापस सवाल करने लग गया क्योंकि समय सिर्फ एक घंटा होता है और ऊपर से उसने और दिमाग खराब कर दिया.
कुछ देर बाद वापस वही invigilator जो मेरे समाज का था, वो आया और मुझे बोला कि वो लड़की आपके गाँव की ही है और हमारे समाज की ही है और अपनी बहन जैसी है, अगर कुछ सवाल बता देंगे तो लड़की की भलाई हो जायेगी.
मैने उसे वापस जवाब दिया कि भाई वो तो बिल्कुल हमारी बहन ही है, गाँव की ही है, पर मैं किसी मेहनत वाले के साथ कैसे अन्याय कर सकता हूँ, मैं ना तो नकल करता हूँ और ना करवाता हूँ. आप लोग जाओ.
फिर मैं अपना एक्जाम करने लग गया.
जब पेपर हो गया तब मैं वो सेंटर वाले हॉल के बाहर ही मिल गये, तब मैने उनको कहा कि आप लोग क्यों कर रहे हो ऐसा, अब तक नहीं सुधरे यार.
हम लोग रोज इसके खिलाफ लड़ रहे हैं और सबसे पहली बात कि आज जब इस अन्याय कि सजा मैं खुद भुगत रहा हूँ, आज अगर MTS और CGL में नकल ना हुई होती तो हम जैसे मेहनत वाले न्याय लिए गिड़गिड़ा नहीं रहे होते. आज मुझ जैसे हजारों मेहनत करने वालों को नौकरी मिल गई होती और देश को अच्छे कर्मचारी मिल गये होते.
पर तुम लोग नकल करवाते हो या तो पेपर लीक हो जाता है या मेरिट 85% से ऊपर चली जाती है(MTS में).
गलती तुम लोगों की, चंद रूपयों का तुम्हारा लालच लाखों युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहा है.
वो बोला ये तो आपकी सोच है, आजकल ये तो सब चलता ही है और कुछ सवाल बताने से क्या फर्क पड़ जाता, लड़की का भला हो जाता, हमारी बहन जैसी ही है.
मैने कहा भाई ये बोर्ड का एक्जाम नहीं है कि उसको मदद करने पर वो पास हो जायेगी, यहाँ एक-एक नंबर के लिए हम मेहनत करते हैं, लोग कुछ पॉंईंट्स से नौकरी पाने से वंचित रह जातें है.
मैं आज आप जैसों के कुकर्मों के नतीजे भुगत रहा हूँ इसिलिए जानता हूँ कि क्या बीतती है जब नकल या लीक के वजह से हम मेहनत वालों की मेहनत और जीवन बर्बाद होता है.
यहीं से कुछ लड़कों ने नकल करके MTS में 90% से ज्यादा नंबर लाये और उन्हें आसानी से नौकरी मिलेगी (क्योंकि सरकार ने SSC की पूर्ण CBI जाँच नहीं मांगी) और हम मेहनत करने वाले उन नकल वालों की वजह से असमंजस में हैं कि नौकरी मिलेगी या नहीं.
फिर मैं वहाँ से निकल आया.
रास्ते में सोच रहा था कि इतने दिन से ट्विटर पर गीत गाने का क्या फायदा जब कुछ भी नहीं बदल रहा है.
ये नकल आज भी जारी है, स्क्रीन कॉपी करके किसी और के लिए पेपर करने की बातें भी बाहर आ ही रही हैं, लेकिन सरकार SSC की पूर्ण जांच ना करके सिर्फ CGL MAINS की ही जांच करवाने को मानी वो भी कई दिन लगातार SSC दफ्तर के आगे धरना देने के बाद.
हमें SSC की पूर्ण जांच और SSC की व्यवस्था में परिवर्तन इसिलिए चाहिए कि हमारा सरकारी नौकरियाँ पाने के लिए जोश बना रहे और सिस्टम में हमारा विश्वास बना रहे और मेहनत वाले छात्रों के साथ अन्याय ना हो ऐसी व्यवस्था बने.
हालांकि इस सरकार में लगातार सरकारी नौकरियों में कटौती की जा रही है, उसपर भी हम बच्चों ने ज्यादा कुछ विरोध नहीं किया पर कम से कम जितनी भी सीटों के लिए परीक्षा ले रहे हो वो तो सही से करवाओ.
एक बार के लिए जरा सोचिये कि रिश्वत देकर नकल करके या सेटिंग करके जो व्यक्ति सरकारी नौकरी पायेगा वो किसी विभाग में जाते ही पहले अपनी रिश्वत की रकम वसूल करेगा ना?? और वो वसूल कैसे करेगा या तो हम आम जनता से रिश्वत लेगा या देश की खूफिया जानकारियाँ बेचेगा जो कि एक दिन देश को नुकसान पहुंचायेगी. क्योंकि इन परीक्षाओं को पास करके छात्र NIA, CBI, CIC, CVC, Home ministry, Defense ministry जैसे बहुत महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभागों में ज्वाइनिंग मिलती है.
ये बात अगर हमें समझ आती है तो सरकार को या आप आम जनता को क्यों समझ नहीं आती??
क्यों हमारा साथ नहीं देते??
जब SSC Scam बाहर आया तो आप में से कितनों ने हमारा साथ दिया?
या अब जब 31 मार्च को हम वापस दिल्ली में विशाल हल्ला बोल करने जा रहे हैं तो आप हमारा सहयोग देंगे??
मुझे उम्मीद है कि आप अन्याय के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमारा साथ देंगे क्योंकि कहीं ना कहीं ये आपको भी प्रभावित करता है, और नहीं भी करता तो कम से कम मानवता के नाते ही सही हमारा साथ दें.
या इतना सोचकर साथ दें कि कल को अगर आपके साथ कोई अन्याय हो तो कोई तो आपके साथ खड़ा रहेगा क्योंकि आपने भी किसी का उसके बुरे समय में साथ दिया था.
हमेशा याद रखें कि सिर्फ सरकारें बदलती है बाकी समस्याऐं और सिस्टम वही बना रहता है, जब तक कोई आकर उस सिस्टम को झंझोड़ ना दे.
मैने कल जो किया, मुझे खुशी है कि कम से कम मैने मेरे स्तर पर किसी मेहनती प्रतिभागी के साथ अन्याय होने नहीं दिया.
बाकी सरकार से या किसी व्यक्ति विशेष से हमारी खास लड़ाई नहीं है, हमें बस एक विश्वासी और स्वच्छ परीक्षा व्यवस्था चाहिए क्योंकि हम तो पढने वाले छात्र हैं, जो घरवालों के लाख कहने पर भी सब्जी तक लाने तक के लिए घर से नहीं निकलते ताकि कहीं पढाई में बाधा ना आये, वो आज दिल्ली तक जाने को मजबूर हैं तो कुछ तो मुद्दा होगा ना हमारा. कृपा करके इसपर आंखे मूंदकर ऑस्ट्रिच प्रवृति ना अपनायें, क्योंकि एक ना एक दिन ये चुप्पी देश को बहुत नुकसान पहुंचायेगा.
हमारी बस एक मांग है कि SSC की समयबद्ध CBI जांच हो जिसमें SSC द्वारा कराये गये हालिया एक्जाम की (खासकर MTS, CGL, CHSL, DP, CPO) पूर्ण जांच हो और जो छात्र इसमे लिप्त पाये जाये उन्हें प्रतिबंधित करें, सजा दें और जो माफिया इसके पीछे है उनपर कड़ी कार्यवाही हो और कड़े नियम बने ताकि आगे से ऐसा ना हो.
दूसरी मांग है कि SSC की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन हो और SSC में ढेर सारे रिफार्म लाये जायें जो कि बच्चों के लिए हितकर हो जैसे waiting list बनाना, ज्वाइनिंग की प्रक्रिया जल्द हो, परीक्षा का तय कैलेंडर हो जो बार-बार बदले ना जायें, परीक्षा की पूर्ण प्रक्रिया में तेजी लाना इत्यादि.
ये मांग से ज्यादा बस सरकार से एक गुहार और उम्मीद है.
इस सिर्फ एक मांग के लिए हम वापस 31मार्च को वापस दिल्ली "हल्ला बोल" करने जा रहे हैं, अगर आप SSC या अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो एक दिन के लिए आप युवा शक्ति दिखाने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जरूर आयें और दूसरों के भरोसे पर कभी क्रांति लाये जाने का इंतजार ना करें.
एक दिन अगर आप खुद के लिए आवाज उठाने के लिए नहीं आ सकते तो याद रखें कि कोई आपके लिए आवाज नहीं उठायेगा.
मुझे उम्मीद है कि आप आयेंगे और खुद की लड़ाई लड़ेगे.
ये ब्लॉग पढने के लिए बहुत धन्यवाद. आपकी राय यहाँ आमंत्रित है या फिर मुझे ट्विटर पर भी अपने विचार बतायें Twitter.Com/@PrashuBikaneri पर.
जय हिंद! वंदे मातरम! इंकलाब जिंदाबाद!

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